3 और 4 जुलाई को होगी गुरुपूर्णिमा और चातुर्मास कलश स्थापना
जतारा – मनुष्य अनेक प्रकार के पाप कर्म करता रहता है उस पाप कर्म के द्वारा सतत अशुभ- पाप कर्मों का ही बंध करता रहता है, वे ही कर्म जब उदय में आते है तो यह जीव अनेक प्रकार से उन उदयागत कर्मों का फल भोगते हुए दुःखी होता रहता है किन्तु जब मनुष्य पाप कर्मों से छूटकर पुण्य कर्म में अपने को लगाता है तो यह जीव दुःखों से छूटकर सुख- अनुकूलताओं के साथ जीवन बिताते हुए एक दिन परम सुख को भी प्राप्त कर लिया करता है। ऐसा मांगलिक उदबोधन भगवान नेमिनाथ की वेदी प्रतिष्ठा के आयोजन में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए नगर गौरव आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने दिया।
आचार्य श्री ने धर्म प्रेमियों को सत्प्रेरणा देते हुए कहा – हे माताओं ! कभी अपनी तुलना किसी रानी – महारानी या सेठानी से मत करना, अरे! अपनी तुलना यदि करना ही हो तो उस’ पिसनहारी की मडिया’ बनाने वाली उस माँ से कर लेना जिसने आटा चक्की पीस-पीसकर भगवान जिनेन्द्र का मंदिर बनवाया था । बन्धुओं! आज भी जबलपुर में’ वह स्थान ‘पिसनहारी की मडिया” के नाम से प्रसिद्धि को प्राप्त हो रहा है । यह मनुष्य पर्याय किसी सामान्य पुण्य से प्राप्त नहीं होती, अतिशय पुण्य से यह मानव पर्याय की प्राप्ति होती हैं और सदराह पर चलते हुए मानव जब सच्चे देव शास्त्र -गुरु की शरण को प्राप्त करता है तो यही मानव पर्याय सातिशय पुण्य को प्रदान करने वाली हो जाती है । बन्धुओ, यह मानव पर्याय वह स्थान है जहाँ से मानव अपनी बुकिंग स्वर्गों के विमानों में भी करा सकता है। क्योंकि जिनेन्द्र भगवान की भक्ति आराधना करने से प्राणियों को स्वर्ग और मोक्ष लक्ष्मी सहज ही प्राप्त हो जाती है । वास्तव में हम भगवान की प्रतिष्ठा नहीं करते अपितु भगवान को वेदी पर विराजमान करके हम अपनी ही प्रतिष्ठा को बढ़ा लिया करते हैं क्योंकि जब भगवान को मोक्ष-निर्वाण हुआ था तब ही वे सिद्ध शिला पर विराजमान हो गए थे। भगवान को वेदिका पर विराजमान करते हुए हम अपनी ही प्रतिष्ठा को तीनों लोकों में बढ़ा लिया करते हैं। भगवान को वेदी पर विराजमान करने का सौभाग्य पुण्यशाली जीवो को ही प्राप्त होता है ।
घटयात्रा के बाद हुई बेदी शुद्धि, ध्वजारोहण और याग मण्डल विधान
भारतीय जैन संगठन अध्यक्ष एवं जैन समाज जतारा उपाध्यक्ष अशोक कुमार जैन ने बताया कि प्रातःकाल भक्तामर आराधना के बाद,वेदी प्रतिष्ठा एवं सिद्धचक्र महामंडल विधान की घटयात्रा जैन मंदिर से प्रारंभ हुई जो नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए पुन: जैनमंदिर पहुँची।सौभाग्यवती माताओ मे मंगल कलश के जल से नवीन वेदिका की शुद्धि की, पश्चात सौभाग्यशाली परिवार द्वारा वेदी प्रतिष्ठा एवं सिद्धचक्र महामण्डल विधान का ध्वजारोहण सम्पन्न किया गया, मध्याहन वेला में श्री याग मण्डल विधान सम्पन्न हुआ। 26 जून से सिद्धचक्र महामंडल विधान के माध्यम से सिद्ध भगवन्तों की महा-अर्चना प्रारंभ होगी । भक्तामर महामंडल विधान के माध्यम से पुण्यार्जन करने का सौभाग्य श्रीमति जिप्सी-आशीष जैन, आशिता जैन, बिलासपुर, श्रीमति अनीता -महेन्द्र टानगा अध्यक्ष, दि0जैन समाज प्रबंधकारिणी समिति जतारा,एवं समस्त टानगा सिघई परिवार जतारा को प्राप्त हुआ ।